Student Blog Published on 2025-02-05 राहें कभी सीधी नहीं होती धूप–छाँव की तरह, कभी मिलती, कभी खोती । मन मे उथल पुथल, दिल में सवाल फिर भी चल पड़े हैं हम, बिना किसी हलचल । ग़म की बारिश हो या फिर सुख का मौसम मंजिल की ओर बढ्ते हैं हर कदम हर रफ़्तार । न जाने कितनी बार टूटी हैं उम्मीदें फिर भी विश्वास ने हमें उठाया, सिखाया । सपने अगर टूटे तो क्या हुआ ? उन्हें फिर से जोड़ने का हौसला है । रुकेंगे नहीं हम, क्योंकि हर गिरावट के बाद उठने का एक और मौका है । मंजिल तक पहुँचने की ये राह काठिन है लेकिन हर दर्द की अपनी एक सजा है । हम चलते रहेंगे थककर, नहीं रुकेंगे क्योंकि मंजिल हमें अपनाने का इरादा है । अंशिका शर्मा ११ ‘ए’