Student Blog Published on 2025-02-05 ख्वाबों की दुनिया में खो जाते हैं हम अपने जख्मों को छुपाते हैं हम । सपनों की रंगीन राहों में चलते कभी खो जाते हैं, कभी पाते हैं हम । इंसानियत के बीच भी एक अजनबी से राहों में उलझे फंसे रहते हैं हम । सच और झूठ के बीच रास्ते बदलते फिर भी आगे बढ़ते जाते हैं हम । कभी हँसते हैं, कभी रोते हैं हम ख्वाबों की दुनिया में खो जाते हैं हम । सपनों के अँधेरे से निकल के आती रोशनी में फिर से जीते हैं हम । अंशिका शर्मा ११ ‘ए’