
मेरी आत्मकथा
--- ट्विंकल पांडिया
हर इंसान की अपनी एक कहानी होती है। जो इंसान अपनी सारी अथवा बहुत लंबी जिंदगी की चुका हो, उसके पास लोगों को बताने लायक बहुत-सी मजेदार बातें और सीख देने वाले अनुभव होते हैं। परंतु मेरी उम्र अभी उतनी नहीं हुई है। भले ही जिंदगी के बारे में मेरा अनुभव कम है, पर फिर भी अपने इस 17 साल के जीवन में बीते वे हर पल जिन्होंने मुझे आज की किशोरी में परिवर्तित किया है, इस आत्मकथा के द्वारा आप सबको बताना चाहती हूँ। मेरा नाम है ट्विंकल पांडिया है। मुझे मेरे दोस्त और शिक्षक 'ट्विंकल ट्विंकल लिटिल स्टार' भी कहते हैं।
वैसे तो मेरा जन्म भारत में राजस्थान के एक छोटे से गाँव नापासर में हुआ था, पर आज मैं अपने माता-पिता, भाई और बहन के साथ नेपाल में रहती हूँ। मैं डीएवी स्कूल, काठमांडू में पढ़ने वाली कक्षा 11वीं की एक विद्यार्थी हूँ। मेरी माता का नाम सुमन पांडिया और पिता का नाम भरत पांडिया है। मेरी कुछ विशेष रुचियाँ हैं--हारमोनियम बजाना, किताबें पढ़ना, नृत्य करना और गाने सुनना। वैसे तो मुझे सिनेमा देखना भी बहुत पसंद है, जिसके कारण मेरी एक विचित्र रुचि यह भी होने लगी है कि कभी-कभी मैं आईने के सामने फिल्मी डायलॉग बोलती रहती हूँ। मेरे माता-पिता ने मुझे कभी भी उन कार्यों को करने से नहीं रोका जो मुझे पसंद हैं। मेरे पिता एक बहुत खुले विचारों वाले व्यक्ति हैं, जिन्होंने मुझे हमेशा और भी अधिक साहसी बनने की सीख दी है। वहीं मेरी माता ने मुझे एक संस्कारी, सभ्य और ईमानदार व्यक्ति बनना सिखाया है। परंतु मुझे मनुष्य जीवन का असली तात्पर्य तब समझ में आया जब मैं दसवीं की बोर्ड परीक्षा के बाद वृंदावन दर्शन के लिए गई थी। वहाँ जाना मेरे जीवन का सबसे अच्छा और सुंदर अनुभव था। सच कहें तो वहाँ के मंदिर और यमुना माता का दर्शन करके मुझे जो सुख मिला, ऐसा सुख मुझे संसार में कहीं नहीं मिला था। मेरे जीवन में अध्यात्म और भक्ति का बहुत महत्व है। इन सब के साथ-साथ जीवन में कुछ मजेदार भाव भी होने चाहिए, जिन्हें याद करके हम खुद भी हँस सकें और औरों को भी हँसा सकें। मेरे जीवन में भी बहुत से ऐसे कई मजेदार पल हैं, जिन्हें मैं कभी नहीं भूल सकती। जैसे कि बचपन में मैं और मेरे मामा खेलते खेलते नाना के ट्रक में छुप गए थे, जो हमें दूसरे गाँव ले गया। घर में सब हमें ढूँढते ही रह गए थे और काफी हाहाकार मच गया था। बचपन के ऐसे और भी कई छोटे-मोटे और प्यारभरे किस्से हैं, जैसे गली में दोस्तों के साथ मिट्टी से बने छोटे-छोटे बर्तनों के साथ घर-घर खेलना, खेल को और मजेदार बनाने के लिए अपनी-अपनी मम्मीयों की साड़ी पहनकर उनके जैसे काम करने का नाटक करना, लॉकडाउन के समय ऑनलाइन क्लासेज के दौरान दोस्तों से चैटिंग करना, उनके साथ फिल्म देखना आदि।
मेरे जीवन का अधिकतर समय नेपाल में बीता है। यहाँ मेरे बचपन की सबसे ज्यादा और सबसे प्यारी यादें हैं। यहाँ रहकर जो मेरी सबसे पक्की सहेलियाँ बनी हैं, वे हैं -- गुड्डू और अंशु। हम बचपन से एक ही गली में साथ-साथ खेलते पढ़ते हुए बड़े हुए हैं। इनके अलावा स्कूल में भी मेरे काफी दोस्त हैं, जिन्होंने हमेशा मेरे अच्छे और बुरे वक्त में मेरा साथ दिया है। पढ़ाई-लिखाई में मैं ठीक-ठाक हूँ, पर किताबों से बाहर की दुनिया ने मुझे ज्यादा आकर्षित किया है। मेरे लिए किताबी ज्ञान ही सब कुछ नहीं है। अनुभव और जिज्ञासा भी इंसान को बहुत कुछ सीखाते हैं और बहुत कुछ करने की प्रेरणा देती हैं। जैसे मेरे प्रेरणा के स्रोत हैं -- आजादी के वीर भगत सिंह, रानी लक्ष्मीबाई, सुभाष चंद्र बोस जैसी कुछ महान हस्तियाँ, जिन्होंने अपने देश के लिए अपनी जान तक की कुर्बानी दे दी थी। ऐसे ही देश के प्रति योगदान देने वाले लोगों में मेरा नाम भी शामिल हो, यही मेरे जीवन का लक्ष्य है।
मेरा जीवन मेरे परिवार, भगवान श्रीकृष्ण और मेरे देश से प्रेरित है। मैं अपने सपनों को साकार करने के लिए निरंतर प्रयास करती रहूँगी जो मैंने अपने परिवार से सीखा है। मेरा उद्देश्य सिर्फ खुद के लिए नहीं बल्कि समाज और देश के लिए कुछ करने का भी है। मेरे जीवन का असली उद्देश्य है -- सेवा, समर्पण और भक्ति। यही मेरे जीवन की अबतक की कहानी है। यही मेरे जीवन का सार है।